बिहार-उड़ीसा विधान परिषद् का जन्म भारत सरकार अधिनियम, 1919 के तहत 7 फरवरी, 1921 को हुआ । संयुक्त प्रांत के प्रथम भारतीय राज्यपाल श्री सत्येंद्र प्रसन्न बरोन सिन्हा ने इसका उद्दघाटन किया ।
परंतु इसके पूर्व इंडियन काउंसिल ऐक्ट, 1861 तथा 1909 और गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया ऐक्ट 1912 के तहत विधान परिषद् की स्थापना हो चुकी थी ।
20 जनवरी 1913 को बांकीपुर स्थित परिषद् कक्ष में सर वेले के सभापतित्व में संयुक्त विधान परिषद की पाँच बैठकें हुईं । उस समय यह परिषद् बिहार और उड़ीसा के लेफ्टिनेंट गवर्नर की परिषद् कहलाती थी । 7 फरवरी, 1921 को जब बिहार-उड़ीसा विधान परिषद् अस्तित्व में आई तो सर वाल्टर मॉडे प्रथम सभापति मनोनीत हुए। 28 मार्च, 1936 को बिहार के लिए अलग विधान परिषद् गठन किए जाने का आदेश हुआ ।
1938 में विधान परिषद् अपने वर्तमान भवन में काम करने लगी । आज इसके परिसर में एक भव्य एनेक्सी तथा कबीर वाटिका का इजाफा हो गया है ।