सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियां
:
मेरा
राजनीतिक जीवन की घटना काफी दु:खद
है जिसे आजीवन भुलाया नहीं जा सकता। मुझसे पूर्व मेरे
परिवार में मेरे सहोदर भाई स्व. संजय यादव ने राजनीतिक
जीवन की शुरुआत की थी। उस समय जनता दल की सरकार थी। जनता
दल में वे नालन्दा जिला के महासचिव एवं उपाध्यक्ष के पद पर
रहे। नालन्दा विधान सभा से चुनाव हेतु निर्दलीय प्रत्याशी
के रूप में नामांकन किया था, लेकिन उस समय की सत्तारूढ़ दल
ने उन्हें जनता दल के लिए प्रचार-प्रसार करने का आदेश
दिया, और वे चुनाव में बैठ गए। उनकी सामाजिक एवं राजनीतिक
गतिविधियॉ जारी रही, लोगों का सहयोग मिलता रहा। दिनांक -
15.6.1995 को बिहार शरीफ स्थित अपने पैतृक निवास के पास ही
अपराधियों द्वारा गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।
इसके पश्चात वहीं से मेरा सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की
शुरुआत हुई। प्रथम में मुझे नालंदा जिला का युवा जनता दल
का उपाध्यक्ष पद की जिम्मेवारी सौंपी गई। मैं इस पद पर
रहकर पार्टी के लिए बखूबी से कार्य किया। नालंदा जिला के
अलावा पूरे बिहार में राजनीतिक लोकप्रियता हासिल की। समय
बीतता गया, राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन में मुझे काफी मन
लगने लगा। जनता के सहयोग हेतु उनके बीच काफी समय देने लगा।
तत्पश्चात सन 2002 में अपने सहयोगियों के परामर्श से
चुनाव लड़ने का मन बनाया, और उसी के हिसाब से जिले में
कार्यक्रम चलाया। जनता से मुझे काफी सहानुभूति मिली,
जनसहयोग के कारण मेरी राजनीतिक लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती
ही गई। इसके बाद राजनीतिक विद्वेष की भावना से दिनांक
22.12.2002 को मेरे पैतृक आवास पर ही अपराधकर्मियों के
द्वारा बम एवं गोली से हमला किया गया, जिसमें मैं गंभीर
रूप से जख्मी हो गया और महीनों पी.एम.सी.एच. में इलाजरत
रह कर किसी प्रकार स्वस्थ हुआ तथा पुन: समाजसेवा
में जुट गया।
सन् 2003 में स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र नालंदा से
निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में बिहार विधान परिषद् का
चुनाव लड़ा जिसमें मैं 37 वोटों के अंतर से पिछड़कर
द्वितीय स्थान पर रहा। इसके बाद पुन: फरवरी, 2005 में
राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी के रूप में नालंदा जिला
के हिलसा विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और कुछ मतों के
अंतर से हारकर द्वितीय स्थान पर रहा। इसके पश्चात्
नवंबर, 2005 में पुन: हिलसा विधान सभा क्षेत्र से लोक
जनशक्ति पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ा तथा फिर कुछ मतों के
अंतर से हारकर द्वितीय स्थान पर रहा।
सन् 2005 के विधान सभा चुनाव के बाद लोक जनशक्ति पार्टी के
जिलाध्यक्ष के पद पर रहकर समाज की सेवा करता रहा। पुन:
सन् 2009 में लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट से स्थानीय
प्राधिकार क्षेत्र नालंदा से बिहार विधान परिषद् का चुनाव
लड़ा तदोपरान्त विजयी घोषित हुए। चुनाव हेतु क्षेत्रा
भ्रमण के क्रम में जब घर लौटा तो 3 जुलाई, 2009 को नाजायज
रूप से स्थानीय थाना प्रभारी के द्वारा तरह-तरह के झूठे
आरोप लगाकर मुझे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद
मैं दिनांक 25 जुलाई, 2009 को जेल से रिहा हुआ और दिनांक
27 जुलाई, 2009 को बिहार विधान परिषद् के सदस्य के रूप
में शपथ-ग्रहण किया। राजनीतिक और सामाजिक कार्यों के
निर्वहन हेतु मैं काफी दिलचस्पी लेकर आगे कार्य करता
रहूंगा, यही मेरी हार्दिक इच्छा है।