1974 के जयप्रकाश नारायण
आंदोलन में सक्रिय योगदान, वित्तरहित शिक्षा नीति के विरूद्ध
शिक्षक आंदोलन में सहयोग, विभिन्न आंदोलनों में अपनी सक्रिय भुमिका
के कारण दो बार 1980 एवं 1988 में जेलयात्रा, पिछड़े एवं दलित
मुसलमानों की समस्याओं पर हिन्दी तथा उर्दू समाचार-पत्रों में
तथ्यात्मक लेखों का प्रकाशन, राईन जाति को अति पिछड़ा वर्ग घोषित
कराने के संघर्ष में अग्रणी भूमिका, रामलखन सिंह यादव महाविद्यालय
में जन्तू विज्ञान के व्याख्याता, बिहार राज्य संबद्ध डिग्री
महाविद्यालय शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ की पटना जिला इकाई
के अध्यक्ष एवं राज्य कार्यकारिणी के सदस्य, 1998 में बिहार विधान
परिषद् के सदस्य के रूप में निर्वाचन।