जिला - सहरसा (वर्तमान - सुपौल) । पिता
:
वैवाहिक स्थिति :
विवाहित । सन्तान
: एक
पुत्र एवं दो पुत्री
। शिक्षा
: बी.
ए., बी. टी. । व्यवसाय
:
कृषि ।
अभिरूचि
:
पत्रकारिता एवं पुस्तक रचना। स्थायी पता : सर्वहारा आश्रम, राधा नगर,
सहरसा
-852201 ।
वर्तमान पता : विधायक फ्लैट संख्या-एफ/302,
दारोगा
प्रसाद राय, पटना । दूरभाष : 0612-2201764(पटना),
06478-228834(सहरसा आवास)
श्री बलराम सिंह यादव
भारत
की कम्युनिस्ट पार्टी (मा.)
सहरसा, सुपौल एवं मधेपुरा
स्थानीय प्राधिकारनिर्वाचन
क्षेत्र
समाजिक एवं
राजनीतिक गतिविधयां
:
1मार्च 1974 के
छात्र आंदोलन से ही राजनीतिक जिन्दगी की असली शुरुआत हुई। छात्र
आंदोलन में कूद जाने के कारण कानून की पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ी।
छात्र आंदोलन 1974 से आंदोलन के अंतिम पड़ाव 1977 तक पुर्णकालिक
कार्यकर्ता के रूप मे काम किये। अनेकों बार जेल की जिन्दगी गुजारनी
पड़ी। भूमिगत रहकर काम करना पड़ा। आपातकाल 1975 से 1977 तक सहरसा,
मधेपुरा, सुपौल, अररिया एवं नेपाल के ग्रामीण इलाके में भुमिगत
रहकर पत्र-पत्रीका एवं किताब की रचना कर आंदोलन का सफल संचालन करते
रहे एवं आम जनता को इसकी जीनकारी देते रहे। आंदोलन के संदर्भ में '
पुकार गणतंत्र की ' - क्रांतिकारी नाटक, ' छात्रों ने दे दी जान
अपनी ', ' क्या हम एक वर्ष नहीं दे सकते ' आदि लेख लिखकर आम जनता
की क्रांतिकारी चेतना को जागृत किया। व्यवस्था
परिवर्तन, घोर सामाजिक-आर्थिक असमानता, सामाजिक उत्पीड़न के खिलाफ
भड़की भावना के कारण अक्टूबर, 1977 में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट
पार्टी का एक सदस्य बनकर आंदोलन शरू किया। अक्टूबर, 1977 से जून
2003 तक लगभग 26 वर्षों तक, सामाजिक उत्पीड़न, महिला उत्पीड़न,
भेद-भाव, छुआछूत, असमानता, राजनीतिक अपराधीकरण, विकास कार्यों मे
व्याप्त भ्रष्टाचार, जात-पात, पुलिस-सामंती जुल्म के खिलाफ एवं भूमि
हदबंदी कानून को लागू कराने हेतु अनवरत संघर्ष करते रहे जिस कारण
दर्जनों झूठे मुकदमे दर्ज किये गये। दर्जनों बार जेल सेल की कठिन
जिंदगी गुजारनी पड़ी। बी. सी. सी. ओ. में गिरफ्तारी की गयी। इस क्रम
में जदिया भूमि मुक्ति आंदोलन 1992 और बस भाड़ा वृद्धि के खिलाफ
1996 में चक्का जाम आंदोलन में पुलिस हमला में, पुलिस ने (कटैया,
पीपरा, लाठीचार्ज) मृत घोषित कर दिया था। इस लाठीचार्ज में
सौभाग्यवश जान बच गई। जेल से 1978 में ग्राम पंचायत चुनाव में
कोरियापट्टी (त्रीवेणीगंज) के मुखिया निर्वाचित हुए। 1980 में सहरसा
कम्युनिस्ट पार्टी (मा.) के जिला मंत्री निर्वाचित हुए, पार्टी के
व्यस्ततम एवं जनसंघर्षों में रहने के बाद भी मुखिया पद पर रहकर
विकास के क्षेत्र में कोशी प्रमंडल में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
माननीय उच्च न्यायालय
के आदेशानुसार 1997 में मुखिया पद छोड़ देना
पड़ा। लेकिन मुखिया पद पर रहकर जो काम किया उसका लाभ आगे की राजनीति
पर पड़ा। ग्राम
पंचायत चुनाव 2001 में सुपौल जिला पर्षद क्षेत्र संख्या - 25 (त्रिवेणीगंज)
से चुनाव लड़कर भारी मतों से विजय प्राप्त की। पुन: जिला परिषद् के
अध्यक्ष के चुनाव में नामांकन दर्ज कर दिया। 10 जून, 2001 को सुपौल
जिला परिषद् के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। अध्यक्ष पद पर रहकर पंजायती
राज को संवैधानिक अधिकार दिलाने, विकास कार्यों में व्याप्त
भ्रष्टाचार को दूर करने एवं अफसरशाही के खिलाफ संघर्ष छेड़ा। अध्यक्ष पद
से हटने के बाद पुन: जनसंघर्ष और जन आंदोलन को गले लगाया। स्थानीय
निकाय प्राधिकार चुनाव 2003 में सहरसा, सुपौल, मधेपुरा क्षेत्र से
अपना नामांकन भरा। ईस चुनाव में विजयी हुए। 17 जुलाई, 2003 से
बिहार विधान परिषद् की सदस्यता। 19 जुलाई, 2003 को परिषद् सदस्य के
रूप में शपथ ग्रहण।